BIMSTEC: सामरिक महत्व, चुनौतियाँ और भारत की विदेश नीति | UPSC Current Affairs

Akash M Siddharth ·

 

BIMSTEC और बंगाल की खाड़ी में क्षेत्रीय सहयोग: भारत के लिए सामरिक अवसर, चुनौतियाँ एवं आगे की राह

1. संदर्भ एवं हालिया घटनाक्रम (Context & Recent Developments)

हाल के वर्षों में बंगाल की खाड़ी पहल बहु-क्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग (BIMSTEC - Bay of Bengal Initiative for Multi-Sectoral Technical and Economic Cooperation) वैश्विक और क्षेत्रीय कूटनीति के केंद्र में उभरा है।

20 मई 2024 को बिम्सटेक चार्टर के औपचारिक रूप से लागू होने के बाद इस संगठन को कानूनी दर्जा (Legal Personality) प्राप्त हुआ। इसके उपरांत, थाईलैंड की अध्यक्षता में आयोजित 6ठे बिम्सटेक शिखर सम्मेलन (6th BIMSTEC Summit) और 'बैंकॉक विज़न 2030' (Bangkok Vision 2030) के अंगीकार किए जाने से समूह को "समृद्ध, लचीला और खुला बिम्सटेक" बनाने का स्पष्ट रोडमैप मिला है।

दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (SAARC) के निरंतर गतिरोध के बीच भारत अपनी विदेश नीति के दो प्रमुख स्तंभों—'पड़ोसी प्रथम' (Neighbourhood First) और 'एक्ट ईस्ट नीति' (Act East Policy)—को जोड़ने के लिए बिम्सटेक को एक मुख्य रणनीतिक मंच के रूप में देख रहा है।

2. बिम्सटेक की पृष्ठभूमि एवं संस्थागत ढाँचा (Genesis & Institutional Framework)

बिम्सटेक की स्थापना 6 जून 1997 को बैंकॉक घोषणा के माध्यम से हुई थी। प्रारंभ में यह संगठन बांग्लादेश, भारत, श्रीलंका और थाईलैंड के साथ BIST-EC के रूप में गठित हुआ।

  • 1997 के उत्तरार्ध में म्यांमार के प्रवेश के साथ यह BIMST-EC बना।

  • वर्ष 2004 में नेपाल और भूटान के पूर्ण सदस्य बनने के बाद इसका नाम बदलकर बिम्सटेक कर दिया गया।

वर्तमान में यह संगठन 7 सदस्य देशों का प्रतिनिधित्व करता है, जो दक्षिण एशिया (भारत, नेपाल, भूटान, बांग्लादेश, श्रीलंका) और दक्षिण-पूर्व एशिया (म्यांमार, थाईलैंड) के बीच एक स्वाभाविक 'भू-आर्थिक सेतु' (Geo-economic Bridge) का निर्माण करता है।

प्रमुख सांख्यिकीय आयाम:

  • वैश्विक जनसंख्या: विश्व की लगभग 22% जनसंख्या (लगभग 1.8 अरब लोग)।

  • संयुक्त आर्थिक शक्ति: सदस्य देशों का संयुक्त सकल घरेलू उत्पाद (GDP) लगभग 4.5 से 5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर है।

  • रणनीतिक जलमार्ग: विश्व के कुल समुद्री व्यापार का एक-चौथाई हिस्सा बंगाल की खाड़ी के व्यापारिक जलमार्गों से होकर गुजरता है।

3. पुनर्गठित 7 सहयोग क्षेत्र (Streamlined 7 Pillars of Cooperation)

प्रशासनिक जटिलताओं और शिथिलता को दूर करने के लिए कोलंबो शिखर सम्मेलन (5वें शिखर सम्मेलन) में पूर्ववर्ती 14 प्राथमिक क्षेत्रों को घटाकर 7 मुख्य स्तंभों में पुनर्गठित किया गया था, जिनमें प्रत्येक देश एक प्रमुख क्षेत्र का नेतृत्व करता है:

सहयोग का स्तंभ (Pillar)नेतृत्वकर्ता देश (Lead Country)

व्यापार, निवेश और विकास

बांग्लादेश

पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन

भूटान

सुरक्षा एवं ऊर्जा

भारत

कृषि एवं खाद्य सुरक्षा

म्यांमार

जन-जन का संपर्क (People-to-People Contact)

नेपाल

विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार

श्रीलंका

कनेक्टिविटी (परिवहन व लॉजिस्टिक्स)

थाईलैंड

4. भारत के लिए बिम्सटेक का बहुआयामी सामरिक महत्व (Strategic Significance for India)

(क) सार्क (SAARC) का व्यावहारिक विकल्प

सार्क की प्रक्रियाएँ पाकिस्तान के अड़ियल रुख, सीमा पार आतंकवाद और सहमति-आधारित निर्णय प्रणाली के दुरुपयोग के कारण 2016 (उरी हमले) से ठप पड़ी हैं। बिम्सटेक भारत को एक ऐसा क्षेत्रीय मंच प्रदान करता है जो पाकिस्तान-मुक्त है, जिससे क्षेत्रीय परियोजनाओं को बिना किसी द्विपक्षीय वीटो के आगे बढ़ाया जा सकता है।

(ख) पूर्वोत्तर राज्यों का कायाकल्प (Development of North-East)

भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को प्रायः 'लैंड-लॉक्ड' (Landlocked) माना जाता है। बिम्सटेक के जरिए इन राज्यों को बंगाल की खाड़ी और दक्षिण-पूर्व एशियाई बाजारों तक सीधी पहुँच प्राप्त हो रही है:

  • कलादान मल्टी-मॉडल ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट: कोलकाता को म्यांमार के सितवे बंदरगाह और मिजोरम से जोड़ता है।

  • भारत-म्यांमार-थाईलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग (IMT Trilateral Highway): मोरेह (मणिपुर) से माई सोत (थाईलैंड) तक सड़क संपर्क स्थापित करता है।

(ग) इंडो-पैसिफिक विज़न और चीनी प्रभाव का संतुलन

चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) और हिंद महासागर में "स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स" नीति का मुकाबला करने के लिए बंगाल की खाड़ी में भारत की उपस्थिति अनिवार्य है। बिम्सटेक भारत को नियम-आधारित समुद्री व्यवस्था और सुरक्षा प्रदाता (Net Security Provider) के रूप में स्थापित करता है।

(घ) डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर (DPI) और ऊर्जा ग्रिड

भारत बिम्सटेक देशों के साथ अपने डिजिटल बुनियादी ढाँचे (जैसे Unified Payments Interface - UPI) को एकीकृत कर रहा है। इसके साथ ही, बेंगलुरु में बिम्सटेक ऊर्जा केंद्र (BIMSTEC Energy Centre) की स्थापना सीमा पार विद्युत व्यापार (Cross-border Electricity Trade) को सुगम बना रही है।

5. बिम्सटेक के समक्ष प्रमुख चुनौतियाँ (Key Structural & Operational Challenges)

बिम्सटेक की व्यापक संभावनाओं के बावजूद यह संगठन कई गंभीर बाधाओं से जूझ रहा है:

1. मुक्त व्यापार समझौते (FTA) में अत्यधिक विलंब

वर्ष 2004 में बिम्सटेक एफटीए फ्रेमवर्क समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे, लेकिन दो दशकों से अधिक समय बीत जाने के बाद भी टैरिफ, बौद्धिक संपदा और सेवा व्यापार पर आम सहमति न बन पाने के कारण पूर्ण FTA लागू नहीं हो सका है। अंतःक्षेत्रीय व्यापार (Intra-regional Trade) अभी भी कुल व्यापार के 6% से कम पर सीमित है (जबकि आसियान में यह 22% से अधिक है)।

2. भू-राजनीतिक तनाव और द्विपक्षीय विवाद

  • रोहिंग्या संकट: म्यांमार और बांग्लादेश के बीच रोहिंग्या शरणार्थी संकट क्षेत्रीय सद्भाव को प्रभावित करता है।

  • म्यांमार का आंतरिक गृहयुद्ध: 2021 के सैन्य तख्तापलट के बाद म्यांमार में जारी नागरिक संघर्ष के कारण त्रिपक्षीय राजमार्ग और कलादान परियोजना की प्रगति बेहद धीमी हो गई है।

3. वित्तीय एवं संस्थागत दुर्बलता

ढाका स्थित बिम्सटेक सचिवालय के पास लंबे समय तक बजट और विशेषज्ञ जनबल की भारी कमी रही है। हालांकि भारत ने 1 मिलियन डॉलर का एकमुश्त अनुदान दिया है, फिर भी संगठन की निर्भरता सदस्य देशों के स्वैच्छिक योगदान पर अधिक है।

4. चीनी आर्थिक प्रभाव की छाया

भारत को छोड़कर बिम्सटेक के अधिकांश सदस्य देश (बांग्लादेश, म्यांमार, नेपाल, श्रीलंका) चीन के BRI नेटवर्क का हिस्सा हैं। इन देशों पर बढ़ता चीनी ऋण और आर्थिक निर्भरता बिम्सटेक की सामूहिक सुरक्षा रणनीति को प्रभावित करती है।

6. बिम्सटेक बनाम सार्क: एक तुलनात्मक विश्लेषण (BIMSTEC vs SAARC)

मापदंडसार्क (SAARC)बिम्सटेक (BIMSTEC)

भौगोलिक दायरा

केवल दक्षिण एशिया तक सीमित

दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया का संगम

प्रमुख शक्ति संतुलन

भारत-पाकिस्तान प्रतिद्वंद्विता से बाधित

भारत निर्विवाद रूप से सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और प्रेरक शक्ति

ऐतिहासिक सफलता

तनाव और अविश्वास के कारण निष्प्रभावी

आर्थिक और सुरक्षा अभिसरण के प्रति अधिक आशावादी

रणनीतिक संरेखण

भारत की 'एक्ट ईस्ट' नीति से सीधा संबंध नहीं

भारत की 'एक्ट ईस्ट' और 'इंडो-पैसिफिक' दृष्टि से पूरी तरह सुसंगत

7. आगे की राह (Way Forward)

  1. मुक्त व्यापार समझौते (FTA) का शीघ्र समापन: आर्थिक एकीकरण को व्यावहारिक बनाने के लिए सदस्य देशों को गैर-टैरिफ बाधाओं (NTBs) को हटाना होगा और सेवाओं व निवेश से जुड़े समझौतों को तेजी से अंतिम रूप देना होगा।

  2. मास्टर प्लान फॉर ट्रांसपोर्ट कनेक्टिविटी का क्रियान्वयन: एशियाई विकास बैंक (ADB) द्वारा चिन्हित 167 से अधिक कनेक्टिविटी परियोजनाओं के लिए वित्तीय जुटाव (Resource Mobilization) प्राथमिकता के आधार पर होना चाहिए।

  3. ब्लू इकोनॉमी और समुद्री सुरक्षा सहयोग: बंगाल की खाड़ी में अवैध, असूचित और अनियमित (IUU) मत्स्यन को रोकने और समुद्री डकैती तथा नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ तटरक्षक बलों के बीच वास्तविक समय में खुफिया जानकारी साझा करना (Information Fusion Centre - Indian Ocean Region के जरिए)।

  4. सचिवालय का सुदृढ़ीकरण: स्थायी सचिवालय को आसियान (ASEAN) की तर्ज पर नीति-निर्माण और विवाद निवारण के अधिक अधिकार दिए जाने चाहिए।

8. निष्कर्ष (Conclusion)

बिम्सटेक केवल एक क्षेत्रीय वार्ता मंच नहीं है, बल्कि यह "साझा सुरक्षा और साझा समृद्धि" की अवधारणा पर आधारित 21वीं सदी के इंडो-पैसिफिक का एक महत्वपूर्ण इंजन है। भारत के लिए, बिम्सटेक का सफल होना केवल कूटनीतिक जीत नहीं बल्कि उसके राष्ट्रीय सुरक्षा, पूर्वोत्तर के आर्थिक विकास और दक्षिण एशिया में नेतृत्वकारी भूमिका बनाए रखने की अनिवार्य शर्त है। सदस्य देशों को अपने द्विपक्षीय मतभेदों को परे रखकर सामूहिक विकास की दृष्टि से काम करने की आवश्यकता है।


मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न (UPSC Mains Practice Question)

प्रश्न: "सार्क के ठहराव की पृष्ठभूमि में बिम्सटेक क्षेत्रीय सहयोग के लिए एक व्यवहार्य विकल्प के रूप में उभरा है। हालांकि, इसकी सफलता कनेक्टिविटी परियोजनाओं के समयबद्ध निष्पादन और संस्थागत सुधारों पर निर्भर करती है।" समालोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए। (250 शब्द, 15 अंक)

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